New Delhi – कल यानी की मंगलवार रात को नई दिल्ली के लाल क़िले के पास हुए ब्लास्ट ने पूरे देश को पुराने बम धमाके की याद दिला दी है इस घटना में कई लोगों ने अपनों को खोया है कई लोग घायल हुए हैं हालंकि इस मामले की जाँच जारी है शुरुआती दौर में इस मामले को एक आतंकी एंगल से देखा जा रहा है। आइए जानते हैं की देश में ऐसे कितने बड़े मामले हुए हैं।
प्रमुख घटनाएँ (क्रमवार-संग्रह)
1) 14 फ़रवरी 2019 — पुलवामा (जम्मू-कश्मीर)
क्या हुआ: सीआरपीएफ़ जवानों की काफिले पर एक वाहन-आधारित आत्मघाती हमलावर ने हमला किया; कार में विस्फोटक रखकर हमला किया गया।
नुकसान: 40 से ज़्यादा CRPF जवान शहीद हुए — यह आंकड़ा समचारों में व्यापक रूप से रिपोर्ट हुआ।
क्यों महत्वपूर्ण: यह हाल के सालों का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध VBIED/कार-बम जैसा हमला था जिसने देश-स्तर पर सुरक्षा-रणनीति और सीमा-नीति में बड़ा प्रभाव डाला।
स्रोत (पाठ संदर्भ): देखें Pulwama attack विवरण।
2) 21 फ़रवरी 2013 — दिलसुखनगर (हैदराबाद)
क्या हुआ: हैदराबाद के व्यस्त बाजार/बसे स्टॉप क्षेत्र में दो बम विस्फोट हुए। ये विस्फोट रोडसाइड/IED-टाइप थे — जिन्हें पैकेज/हात से रखे हुए उपकरणों के रूप में बताया गया; कुछ रिपोर्टों में आतंकवादी नेटवर्क के कनेक्शन और मोबिलिटी की बात आई।
नुकसान: लगभग 18 लोगों की मौत और 100+ घायल। कई आरोपियों को पकड़कर कड़ी सज़ाएँ भी दी गयीं (NIA trials में)।
क्यों उल्लेखनीय: यह शहरी भीड़-भाड़ वाले इलाके में हुए IED हमलों का प्रमुख उदाहरण है — यद्यपि यह पारंपरिक “कार बम” नहीं कहला सकता, फिर भी शहरी VBIED/IED पैटर्न से जुड़ा मामला माना गया।
स्रोत: 2013 Hyderabad blasts का केस और बाद की कार्रवाई।
3) 13 फ़रवरी 2010 — पुणे (German Bakery विस्फोट)
क्या हुआ: पुणे के जर्मन बेकरी कैफे के बाहर बम फटा; विस्फोट से भारी जनहानि हुई। यह विस्फोट जगह-पर रखे गए IED से हुआ माना गया — कुछ रिपोर्टों में बम को वाहन/स्कूटर में छिपाकर लाए जाने की संभावनाएँ भी चर्चा में रहीं, पर यह क्लासिक “कार-बम” नहीं था।
नुकसान: ~18 की मौत, कई घायल।
क्यों उल्लेखनीय: शहरी-नागरिक लक्ष्यों पर हुए IED हमलों की श्रेणी में यह एक बड़ा मामला था और आतंकियों के शहरी-हिट रणनीतियों को दर्शाता है।
स्रोत: 2010 Pune bombing रिपोर्ट।
4) अन्य उल्लेखनीय विस्फोट / VBIED-शैली के हमले (संदर्भात्मक तीव्र घटनाएँ और जाँच)
- 2007 Samjhauta Express (रेल पर बम) — ट्रेन-कार्गो/वैन में बम रखे जाने से बहुत बड़ी जनहानि हुई; यद्यपि यह एक ट्रेन-हमला था न कि सड़क-कार। इसका जिक्र इसलिए क्योंकि बड़े-वहन आधारित विस्फोटों की श्रेणी में आता है और जाँच की दिशा VBIED-प्रवृत्तियों से मिलती है।
- कई छोटे-मोटे स्थानीय IED/लॉ कल-स्केल विस्फोट (बाजार/बस स्टॉप/अतिरिक्त): भारत के विविध हिस्सों में समय-समय पर IED/एक्सप्लोसिव घटनाएँ हुईं — कुछ वाहन-आधारित, कुछ पैकेज/बैग/मोटरसाइकिल/बेलन-टाइप। ऐसे मामलों की विस्तृत सूची सरकारी रिपोर्ट्स/स्थानीय न्यूज़ आर्काइव से ली जा सकती है; समेकित टाइमलाइन के लिए समाचार-लाइन-अप/टाइमलाइन आर्टिकल उपयोगी हैं।
5) नवीनतम उदाहरण (2025 दिल्ली — लाल किला क्षेत्र के पास कार विस्फोट)
क्या हुआ: दिल्ली के लाल किला/रेड फोर्ट इलाके के पास (मेट्रो-गेट के नज़दीक) एक कार विस्फोट हुआ जिसमें कई लोग मारे गए और कई घायल हुए — घटना के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसियाँ और दिल्ली पुलिस सक्रिय हुईं; वाहन-आधारित विस्फोट के रूप में जाँच जारी।
क्यों उल्लेखनीय: यह घटना दिखाती है कि बड़े-सांकेतिक/प्रतीकात्मक स्थानों पर भी वाहन-आधारित विस्फोट हुए/हो सकते हैं, और इसमें राज्यों के बीच मिलने वाले सुराग (छापेमारी) सामने आये। (ताज़ा रिपोर्ट्स के लिए समाचार देखें)।
सारांश-विश्लेषण (क्या पैटर्न दिखता है?)
- VBIEDs का लक्ष्य-प्रकार: सुरक्षाबलों की काफिलों पर किए जाने वाले आत्मघाती वाहन हमले (जैसे पुलवामा) सबसे अधिक विध्वंसक होते हैं; जबकि शहरी भीड़-भाड़ वाले इलाकों में IED/रूपी विस्फोट (बाज़ार, बस स्टॉप) नागरिक लक्ष्य होते हैं।
- आयाम और जियोग्राफी: हमले सारे देश में बिखरे हुए हैं — जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों से लेकर महानगरों (हैदराबाद, पुणे, दिल्ली) तक। यह दिखाता है कि खतरा केंद्रीय व सीमांतीय दोनों तरह से हो सकता है।
- नियंत्रण और जाँच: बड़े मामलों में NIA, सीबीआई और राज्य-एजेंसियाँ शामिल हुई हैं; कई मामलों में गिरफ्तारी, मुक़दमे और अदालत-निर्णय भी देखे गए (उदा. हैदराबाद Dilsukhnagar के आरोपियों को सज़ाएँ)।
