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पुतिन का हंगरी दौरा: ICC गिरफ्तारी वारंट के बीच राजनीतिक और कानूनी विचार

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पुतिन और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच बुडापेस्ट में प्रस्तावित बैठक ने International Criminal Court (ICC) के जारी गिरफ्तारी वारंट और यूरोपीय राजनैतिक व्याख्याओं पर नई बहस ला दी है। यह लेख घटना‑प्रसंग, कानूनी पहलू और संभावित वैश्विक असर पर विस्तृत तथ्य और विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

परिप्रेक्ष्य: क्यों बनी यह बहस?

ICC ने मार्च 2023 में पुतिन के खिलाफ वारंट जारी किया — मुख्य आरोपों में यूक्रेन से बच्चों का जबरन निष्कासन और अन्य युद्ध‑अपराध शामिल हैं। यदि कोई ICC सदस्य देश किसी व्यक्ति को अपने क्षेत्र में पाता है जिस पर वारंट है, तो उस देश का दायित्व है कि वह गिरफ्तारी कराकर ICC के समक्ष प्रस्तुत करे।

कानूनी और प्रायोगिक तथ्य

ICC का अधिकार क्षेत्र और सीमाएँ

Rome Statute के सदस्य देशों पर ICC के आदेश लागू होते हैं; हालाँकि रूस, अमेरिका और चीन Rome Statute के पक्ष में नहीं हैं। इसीलिए ICC के वारंट का प्रभाव तभी स्पष्ट होता है जब वारंट वाले व्यक्ति किसी सदस्य देश के क्षेत्र में हों।

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हंगरी की भूमिका

हंगरी, जिसका नेतृत्व Viktor Orbán करते हैं, ने 2025 में ICC से बाहर निकलने की मंशा जताई — पर कानूनी प्रक्रियाएँ और समयसीमा अभी पूरी नहीं हुई हैं। इसके बावजूद Orbán की सरकार ने पुतिन‑ट्रम्प बैठक के लिए सुविधाएँ सुनिश्चित करने का इरादा जताया, जिसका अर्थ है कि यूरोपीय राजनीतिक सहमति में दरार दिखती है।

यात्रा मार्ग और निष्पादन संबंधी चुनौतियाँ

रूसी विमानों पर EU के एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण पुतिन के लिए हंगरी पहुँचना जटिल हो सकता है — वैकल्पिक मार्गों या कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता होगी। साथ ही, यदि हंगरी ICC के दायरे में बनी रहती है तो औपचारिक रूप से गिरफ्तारी की कानूनी जिम्मेदारी बनती है, पर व्यवहार में राजनैतिक निर्णय अलग हो सकते हैं।

रणनीतिक और राजनीतिक असर

यदि पुतिन हंगरी में सुरक्षित रूप से भ्रमण कर बैठक करते हैं, तो यह ICC की प्राधिकरणता के लिए हानिकारक होगा और वैश्विक न्याय के सिद्धांतों पर सवाल उठाएगा। साथ ही, यह पश्चिमी गठबंधनों — विशेषकर EU‑NATO — की एकता पर भी असर डालेगा।

संभावित परिणाम

  • ICC की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता घट सकती है।
  • हंगरी की राजनीतिक छवि और EU में फूट बढ़ सकती है।
  • रूस‑यूक्रेन संघर्ष पर नई कूटनीतिक गतिशीलता उभर सकती है।

निष्कर्ष और आगे की चुनौतियाँ

यह बैठक सिर्फ एक राजनयिक आयोजन नहीं है — यह अंतरराष्ट्रीय न्याय, सदस्य राज्यों की जवाबदेही और वैश्विक सत्तासंतुलन के संदर्भ में एक निर्णायक घटना बन सकती है। वैश्विक समुदाय को देखें कि किन कानूनी और राजनैतिक औजारों से ऐसी स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

लेखक: गुलशन कुमार (पत्रकार)
संपादन:https://babajinews.com/

 

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