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MEA का बयान — “गुप्त/अवैध परमाणु गतिविधियाँ पाक के इतिहास के अनुरूप हैं”; भारत ने ट्रम्प के दावे पर ली नोटिस

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नई दिल्ली — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान के बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि पाकिस्तान की गुप्त और अवैध परमाणु गतिविधियाँ उसके इतिहास के अनुरूप हैं। MEA के प्रवक्ता रन्धिर जायसवाल ने शुक्रवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में यह टिप्पणी की, जब उनसे ट्रम्प के उस दावे पर प्रतिक्रिया मांगी गई जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान—साथ ही रूस, चीन और उत्तर कोरिया—गुप्त रूप से अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं।

MEA ने क्या कहा?

MEA प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ उठ रहे ये आरोप “पाकिस्तान के इतिहास के अनुरूप” हैं, और उन्होंने इस संदर्भ में दशकों से होने वाली तस्करी, निर्यात-नियंत्रण उल्लंघन और A.Q. खान नेटवर्क का जिक्र किया। जायसवाल ने कहा कि भारत पहले भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पाकिस्तान में ऐसे असामान्य परमाणु व्यवहार की ओर आकर्षित कर चुका है।

ट्रम्प के दावे और पाक की प्रतिक्रिया

ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि कुछ देश — जिनमें उन्होंने पाकिस्तान का नाम भी लिया — अपने परमाणु हथियारों के परीक्षण कर रहे हैं। इस पर पाकिस्तान ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा कि वह ऐसा कोई कार्य नहीं कर रहा। अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इस प्रकार के बयानों पर कूटनीतिक रूप से सतर्क रहे हैं क्योंकि ये क्षेत्रीय सुरक्षा-परिस्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं।

पृष्ठभूमि क्यों है यह बयान महत्वपूर्ण?

पाकिस्तान का परमाणु इतिहास विवादों से अछूता नहीं रहा — 1990 के दशक में A.Q. खान नेटवर्क से जुड़ी तस्करी और प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण के आरोप वैश्विक चिंता के विषय रहे हैं। 1998 में पाकिस्तान द्वारा किए गए सार्वजनिक परीक्षण (Chagai-I/II) और बाद के वर्षों में तकनीकी-तथा नीतिगत पहलुओं पर उठते प्रश्नों के कारण पाकिस्तान की परमाणु गतिविधियाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी का बिंदु रही हैं। इसीलिए MEA के वर्तमान बयान को केवल एक प्रतिक्रियात्मक टिप्पणी के रूप में नहीं, बल्कि एक सतर्क संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

क्या अगले कदम होंगे?

MEA ने कहा है कि भारत संबंधित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और साझेदार देशों को इस तरह के संभावित खतरों की जानकारी देता रहा है। आगे के स्वरूप पर निर्भर करेगा कि क्या किसी तरह का औपचारिक अंतरराष्ट्रीय अनुसन्धान, निगरानी या कूटनीतिक पहल शुरू की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में ठोस और पारदर्शी सबूतों के आधार पर ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिसाद की गुंजाइश बनती है।

डोनाल्ड ट्रम्प के दावे—और उस पर MEA की टिप्पणी—ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में परमाणु पारदर्शिता, गैर-विस्तार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे संवेदनशील विषयों को प्रकाश में ला दिया है। MEA का रुख बताता है कि भारत पाकिस्तान की परमाणु-गतिविधियों पर सतर्क रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे उठाता रहेगा। भविष्य में अनावरण होने वाले तथ्यों के आधार पर ही इससे जुड़े कूटनीतिक तथा सुरक्षा-नतीजे स्पष्ट होंगे।

 

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