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India ने Sir Creek में उतार दी सेना, Pakistan ने किया Air Space बंद

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पश्चिमी भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित विवादित क्षेत्र Sir Creek (सिर क्रीक) फिर से रणनीतिक सुर्खियों में है। हाल के दिनों में भारत की तरफ से इस क्षेत्र में अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ाने और त्रि-सेवाओं (आर्मी, नेवी, एयरफोर्स) के संयुक्त अभ्यास की तैयारी के चलते पाकिस्तान में खलबली मची हुई है। नीचे इस स्थिति का स्थिति-विश्लेषण दिया गया है।

  1. क्या है Sir Creek का महत्व?

Sir Creek एक लगभग 96-98 किमी लंबा दलदली (मार्श) इलाका है, जो पश्चिमी भारत (गुजरात के कच्छ क्षेत्र) और पाकिस्तान (सिंध प्रांत) के बीच स्थित है।

इसका महत्व सिर्फ सीमावर्ती जंगली इलाका होने तक सीमित नहीं है — इसके कई आयाम हैं:

इसलिए, Sir Creek सिर्फ एक “दलदली पानी वाला क्षेत्र” नहीं बल्कि सामरिक, आर्थिक और रक्षा दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है।

  1. क्या हो रहा है अब? – भारत की तैयारी और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

हालिया घटनाओं में निम्न-बिंदु प्रमुख हैं:

इन सब संकेतों से यह स्पष्ट है कि Sir Creek क्षेत्र अब कमो-बेश युद्ध-स्तर की तैयारी और तनाव-मूलक गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है।

  1. क्यों पाकिस्तान में खलबलीमानी जा रही है?

कई मीडिया स्रोतों ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान इस स्थिति को गंभीरता से देख रहा है — और भारतीय तैयारी से उसने खुद को सतर्क कर लिया है। उदाहरणस्वरूप:

इस प्रकार पाकिस्तान की प्रतिक्रिया – बंदिशें, हाई अलर्ट, बयानबाजी – यह साफ-साफ बताती है कि वहाँ मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ रहा है।

  1. जोखिम-मूलक पहलू और आगे की चुनौतियाँ

हालाँकि अभी तक कोई खुला मुकाबला या युद्धालापी कार्रवाई सामने नहीं आई, लेकिन निम्न बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है:

अब यह कहना गलत नहीं होगा कि Sir Creek सिर्फ एक सीमावर्ती दलदली इलाका नहीं रहा — यह रणनीतिक परीक्षण-मंच बन गया है। भारत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह अपने पश्चिमी सीमाओं पर सक्रिय है, इस क्षेत्र में तकनीकी, सामरिक तैयारियों को बढ़ा रहा है और किसी भी “दुर्भाग्यपूर्ण हरकत” के प्रति चेतावनी जारी कर रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने इस तैयारी को गंभीरता से लिया है और अपने कदम आगे बढ़ाए हैं।

इस प्रकार, इस चरण में विवाद का स्वरूप बदल रहा है — पारंपरिक सीमा विवाद से आगे निकलकर समुद्री-सामरिक, बहु-सेवा संचालन, नया रक्षा-प्रौद्योगिकी आयाम सामने आ रहे हैं। यदि शांति-संवाद और पारदर्शिता नहीं बढ़ी, तो यह स्थिति किसी समय तेज़ी से बदल सकती है।

 

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