• Tue. Aug 26th, 2025

Newsबाबाजी

जानकारी से बनिए जानकार

Budget 2025 : जानिए कैसे बनाया जाता है बजट, जानकारी आपके होश उड़ा देगी

भारत का बजट बनाना एक जटिल और विस्तृत प्रक्रिया है, जो देश की आर्थिक नीति, विकास लक्ष्यों और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। भारत के बजट की तैयारी केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा की जाती है, और इसमें विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, और अन्य सरकारी एजेंसियों का योगदान होता है। आइए जानते हैं कि भारत का बजट कैसे तैयार किया जाता है:

Budget 2025 Speech LIVE: Nirmala Sitharaman proposes to enhance credit  cover for MSMEs to ₹10 crore | Mint

1. बजट की शुरुआत और बजट अनुमान (Pre-Budget Process)

भारत के बजट की प्रक्रिया आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर में शुरू होती है, जब वित्त मंत्रालय आगामी वर्ष के लिए प्राथमिक बजट अनुमान तैयार करना शुरू करता है। इसके लिए कुछ प्रमुख कदम होते हैं:

  • विभागीय ब्रीफिंग और आंकड़े संकलन: सभी मंत्रालय और राज्य सरकारें अपने खर्चे और आवश्यकताओं के बारे में विवरण वित्त मंत्रालय को भेजती हैं।
  • आर्थिक सर्वेक्षण: वित्त मंत्रालय आर्थिक सर्वेक्षण तैयार करता है, जिसमें देश की आर्थिक स्थिति, विकास दर, मुद्रास्फीति, रोजगार, और अन्य प्रमुख आंकड़ों का विश्लेषण होता है। यह सर्वेक्षण आमतौर पर बजट से एक दिन पहले संसद में प्रस्तुत किया जाता है।
  • राजस्व और खर्च का अनुमान: सरकार को अपनी आय और खर्च का अनुमान लगाना होता है। इसमें विभिन्न स्रोतों से आय (जैसे, कर, कस्टम ड्यूटी, जीएसटी, आदि) और खर्च (जैसे, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, सब्सिडी, आदि) की गणना की जाती है।
  • Budget 2025 | Seven key factors to track in the budget speech | Mint

2. वित्तीय वर्ष की निर्धारिती (Estimation for Financial Year)

भारत का बजट हर वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के लिए तैयार किया जाता है। वित्त मंत्रालय यह निर्धारित करता है कि अगले वर्ष में सरकार को कितनी आय (राजस्व) होने की संभावना है और उन आय के साथ कितने खर्चे किए जा सकते हैं। इसमें मुख्यतः दो प्रमुख हिस्से होते हैं:

  • राजस्व बजट: यह सरकार के आय और खर्चों से संबंधित होता है। इसमें करों और अन्य स्रोतों से होने वाली आय का आकलन होता है और उन आय को विभिन्न क्षेत्रों में खर्च करने का विवरण होता है।
  • विकास बजट (Capital Budget): यह बजट सरकार के दीर्घकालिक निवेश और विकास कार्यों के लिए निर्धारित किया जाता है, जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुसंधान और विकास, और सरकारी संपत्तियों की खरीद आदि।

Budget 2023 Key Highlights: Are You Under New Tax Regime? Nirmala  Sitharaman Has Good News for You - News18

3. सरकारी विभागों और मंत्रालयों से परामर्श

बजट तैयार करने के लिए वित्त मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से विचार-विमर्श करता है। मंत्रालयों को उनके आगामी खर्चों के बारे में प्रस्ताव भेजने के लिए कहा जाता है। इन प्रस्तावों के आधार पर बजट में संशोधन और बदलाव किए जाते हैं।

4. बजट का प्रारूप तैयार करना (Budget Drafting)

सभी आंकड़े और प्रस्ताव प्राप्त करने के बाद, वित्त मंत्रालय बजट का प्रारूप तैयार करता है। इसमें:

  • राजस्व (Income): सरकार को किस स्रोत से कितना राजस्व मिलेगा, जैसे आयकर, जीएसटी, कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स आदि।
  • व्यय (Expenditure): सरकार को कहाँ कितना खर्च करना है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि) के लिए निर्धारित खर्च की योजना होती है।
  • उधारी (Borrowing): अगर सरकार को अपने खर्चों के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है, तो वह उधारी ले सकती है। इसके लिए बांड जारी किए जाते हैं या अन्य उधारी साधनों का उपयोग किया जाता है।

Budget 2025: All Personal Taxation Changes Expected From FM Nirmala  Sitharaman - News18

5. बजट प्रस्तुति (Budget Presentation)

भारत के बजट की सबसे महत्वपूर्ण घटना बजट पेश करने की प्रक्रिया है। यह आमतौर पर 1 फरवरी को वित्त मंत्री द्वारा लोकसभा में पेश किया जाता है। वित्त मंत्री बजट का विवरण पढ़ते हैं और इसके प्रमुख पहलुओं को प्रस्तुत करते हैं।

  • मुख्य बिंदुओं का विवरण: बजट में सरकार के आर्थिक लक्ष्यों, योजनाओं और नीतियों का उल्लेख किया जाता है।
  • करों में परिवर्तन: यदि करों में कोई बदलाव (जैसे आयकर दर में बदलाव, नई कर नीति) किया गया है, तो वह इस दौरान बताया जाता है।

इसके बाद बजट पर संसद में बहस होती है, और फिर इसे मंजूरी के लिए पास किया जाता है।

6. बजट की पारिती (Approval of Budget)

बजट पेश करने के बाद संसद में इसकी समीक्षा होती है। यदि संसद द्वारा बजट को अनुमोदित किया जाता है, तो इसे लागू किया जाता है। यदि कोई बदलाव या संशोधन जरूरी होता है, तो वह भी किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के बाद, सरकार अपनी योजनाओं और नीतियों के अनुसार बजट के अंतर्गत काम करना शुरू करती है।

7. बजट का क्रियान्वयन (Implementation)

बजट पास होने के बाद सरकार उस बजट के अनुसार व्यय और निवेश शुरू करती है। मंत्रालयों और विभागों को उनके बजट के हिसाब से फंड जारी किए जाते हैं, और सरकारी योजनाओं को लागू किया जाता है। इस दौरान, सरकार की योजनाओं की प्रगति की निगरानी की जाती है और आवश्यकतानुसार सुधार किए जाते हैं।

8. बजट पर निगरानी और समीक्षा (Monitoring and Review)

बजट लागू होने के बाद, सरकार अपने खर्चों और आय के ट्रैक रिकॉर्ड की निगरानी करती है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि बजट के अनुसार कार्य हो रहे हैं और समय-समय पर रिपोर्ट तैयार की जाती है। अगर किसी क्षेत्र में अतिरिक्त खर्च या राजस्व की कमी होती है, तो उसे संबोधित किया जाता है।

 


निष्कर्ष:

भारत का बजट एक बहुत ही जटिल और विचारशील प्रक्रिया है, जिसमें सरकार की आर्थिक नीतियों, विकास लक्ष्यों, और भविष्य के योजनाओं का विस्तार से खाका तैयार किया जाता है। यह बजट देश की आर्थिक दिशा और नीति को प्रभावित करता है और सभी क्षेत्रों (शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, आदि) में सरकार के खर्च और निवेश को निर्धारित करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *