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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: वे 12 BJP उम्मीदवार जिन्हें मुस्लिम (AIMIM / अन्य) उम्मीदवारों ने हराया

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पटना (बिहार) 15 Nov – 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए ने ऐतिहासिक जीत हासिल की, लेकिन इसके बीच कुछ दिलचस्प और प्रतीकात्मक हारें हुईं — खासकर उन 12 BJP उम्मीदवारों की, जिन्हें मुस्लिम उम्मीदवारों ने मात दी। AajTak की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि बीजेपी ने कुल 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 12 उन जगहों पर हार गई जहाँ प्रतिद्वंद्वी में मुस्लिम उम्मीदवार थे।

यह सिर्फ सीट हारने का मामला नहीं था — ये हार बिहार की सीमांचल (Seemanchal) जैसी मुस्लिम-बहुल क्षेत्रीय राजनीति की नई तस्वीर का हिस्सा भी बन गईं।

हारने वाले प्रमुख BJP उम्मीदवार और उनकी सीटें

AajTak की सूची के अनुसार, उन 12 बीजेपी उम्मीदवारों में कम-से-कम 5 ऐसी सीटें हैं जहाँ हार का सामना सीधे मुस्लिम उम्मीदवार (खासतौर पर AIMIM) से हुआ

नीचे उनके कुछ प्रमुख उदाहरण दिए गए हैं:

विधानसभा क्षेत्र (Seat) BJP उम्मीदवार मुस्लिम प्रतिद्वंद्वी / जीतकर्ता हार का अंतर / विवरण
बायसी (Baisi) विनोद कुमार Ghulam Sarwar (AIMIM) AIMIM के गुलाम सरवर ने उन्हें 27,251 वोटों से हराया।
कोचाधामन (Kochadhaman) बीना देवी Md. Sarwar Alam (AIMIM) AIMIM के सरवर आलम ने यह सीट जीत ली।
किशनगंज (Kishanganj) स्वीटी सिंह शम्स आगाज़ (AIMIM) / अन्य उम्मीदवारों में टक्कर AajTak रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वीटी सिंह को हार का सामना करना पड़ा।
ढाका (Dhaka) पवन कुमार जायसवाल Faisal Rahman (RJD) RJD के फैजल रहमान (या Faisal Rahman) ने सिर्फ 178 वोटों से जीत हासिल की।

(बाकी 7 सीटों पर हार का कारण या विवरण AajTak लेख में स्पष्ट नहीं दिखाया गया है — वहाँ सिर्फ यह कहा गया है कि कुल 12 BJP उम्मीदवार हारे, और 5 में “मुस्लिम उम्मीदवारों” से हार शामिल है।)

पृष्ठभूमि और राजनीतिक महत्व

  1. AIMIM की बढ़ती ताकत
  1. बीजेपी की हारें सिर्फ हार नहीं, संकेत
  1. मत विभाजन (Vote Splitting)

विश्लेषण: यह हार क्यों मायने रखती है

  1. राजनीतिक बदलाव की दास्तां: ये 12 हारें, खासकर वे जहां AIMIM ने जीत दर्ज की, बिहार की मुस्लिम-बहुल राजनीति में बदलाव का संकेत हैं। यह सिर्फ एक “वोट बैंक” समस्या नहीं है, बल्कि हिस्सेदारी की मांग है।
  2. बीजेपी की ताकत में कमी: हालांकि बीजेपी ने कुल मिलाकर शानदार प्रदर्शन किया और बहुमत हासिल किया, लेकिन इन हारों ने दिखाया कि उनकी ताकत सीमांचल जैसे इलाके में पूरी तरह सर्वथा नहीं है।
  3. AIMIM की रणनीति सफल: AIMIM की यह रणनीति कि वे सिर्फ संख्या में मुस्लिम-बहुल सीटों पर लड़ें, और वह भी उन इलाकों में जहाँ उनकी पहचान मजबूत हो, सफल रही। यह पार्टी तीसरे मोर्चे की तरह प्रभावी होती दिख रही है।
  4. भविष्य की राजनीति पर असर: इन नतीजों से आने वाले समय में बिहार की राजनीति में नई गतिकी बन सकती है — पार्टियां मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर और अधिक ध्यान देंगी, और वोटिंग पैटर्न में “पहचान + विकास” के दोहरे एजेंडे का महत्व और बढ़ सकता है।

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ये 12 असफलताएं केवल हार नहीं थीं — ये एक संकेत थीं कि बिहार की मुस्लिम-बहुल विधानसभा सीटों में राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। AIMIM ने न सिर्फ अपनी पहचान बनाए रखी है, बल्कि उसने उन इलाकों में अपनी पकड़ भी मजबूत की है जहाँ मुस्लिम मतदाता पहले पारंपरिक पार्टियों (जैसे RJD या कांग्रेस) पर भरोसा करते थे।

यह बदलाव सिर्फ एक चुनावी परिणाम नहीं है — यह प्रतिनिधित्व की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। आने वाले वर्षों में यह देखना होगा कि बीजेपी, महागठबंधन और AIMIM इस नई राजनीतिक हकीकत को कैसे स्वीकार करते हैं और अपनी रणनीतियों को कैसे बदलते हैं।

 

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