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महाराष्ट्र में निगरानी का आरोप: स्थानीय चुनाव से पहले सुर्ख़ियों में मंत्री-शायर

Allegations of surveillance in Maharashtra: Minister and poet in the news ahead of local elections

मुंबई — आज के समय में किसी भी नेता का बयान सियासी गलियों में तूफ़ान लाने का पूरा काम करता है कुछ ऐसा ही काम Maharashtra की राजनीति में हुआ है यहाँ एक मंत्री के बयान ने कुछ ऐसा कहा है कि अचानक हलचल तेज हो गई है और इस बार फिर निगरानी (surveillance) का मुद्दा सामने आया है। कथित तौर पर राज्य के कुछ मंत्रियों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को अपना मोबाइल फोन बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि उन्हें यह आशंका है कि उनकी कॉल्स, व्हाट्सएप ग्रुप्स तथा संवाद टैप किए जा रहे हैं।

आरोप क्या हैं?

राज्य में निकाय (स्थानीय शासन) चुनाव निकट हैं, और इस प्रकार का आरोप समय-सापेक्ष माना जा रहा है। ऐसा समय जब राजनीतिक दलों को बूथ-वर्क, व्हाट्सऐप ग्रुप संवाद, फील्ड ऑफिसर नेटवर्क आदि पर विशेष निर्भरता होती है — ऐसे में ‘निगरानी’ का डर और भी ज़्यादा महसूस किया जा रहा है।

राजनीतिक एवं संवैधानिक मायने

आगे क्या हो सकता है?

महाराष्ट्र में ‘निगरानी का आरोप’ एक चिंताजनक संकेत है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में संवाद-स्वतंत्रता और गोपनीयता को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं। स्थानीय चुनाव के समय ऐसा आरोप-प्रस्ताव न सिर्फ राजनीतिक धरती को असर करता है, बल्कि जनता के बीच चुनाव की निष्पक्षता व भरोसे को भी प्रभावित कर सकता है। समय आने पर यह स्पष्ट होगा कि यह सिर्फ राजनीतिक रट लग रही है या इसके पीछे तथ्य-आधारित मामला है।

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