भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। यह दिन खास तौर पर भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भक्त व्रत रखकर, पूजा-पाठ करके और “अनंत सूत्र” धारण करके जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हैं।

🙏 अनंत चतुर्दशी का महत्व
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अनंत चतुर्दशी का अर्थ है “अनंत भगवान” यानी भगवान विष्णु का अनंत स्वरूप।
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मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से जीवन के दुख-दर्द समाप्त होते हैं और घर में शांति आती है।
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इस दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है, इसलिए महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों में इसका विशेष महत्व है।
🕉️ पूजा विधि
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सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
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भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को पीले वस्त्र में सजाएँ।
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फल-फूल, पंचामृत, तुलसी और पीले फूल अर्पित करें।
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“अनंत सूत्र” (कुंकुम और हल्दी से रंगा हुआ पवित्र धागा) विष्णु जी को अर्पित करें और फिर दाहिने हाथ में बाँधें।
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“ॐ अनन्ताय नमः” मंत्र का जाप करें।
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शाम को व्रत कथा का श्रवण करें और प्रसाद का वितरण करें।
📖 धार्मिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब पांडव वनवास में थे तो द्रौपदी ने अनंत चतुर्दशी का व्रत किया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर पांडवों के कष्ट दूर किए। तभी से यह व्रत “अनंत सूत्र” के साथ किया जाता है।
🌼 इस दिन के शुभ कार्य
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अनंत सूत्र धारण करना।
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गरीबों को भोजन और दान करना।
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घर में विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना।
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गणेश विसर्जन के समय “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बनाना।
अनंत चतुर्दशी केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं है, बल्कि यह विश्वास, आस्था और भक्ति का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन और व्रत करने से जीवन में अनंत खुशियाँ और समृद्धि आती है।
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